Monday, September 13, 2021

लेखन और अनुशासन



लेखन...यानी  मानवीय विचारों एवं अनुभूतियों के संचार का लिपिबद्ध साधन...बोलना और लिखना एक दूसरे से काफी भिन्न हो सकते हैं जिसमे आश्चर्य नहीं..वस्तुतः यह एक सरलता से जटिलता की ओर जाने वाली प्रक्रिया है। लिखना बोलने से अधिक महत्वपूर्ण होता है..तुलनात्मक रूप से लिखते समय जहां एक तरफ हमारा मस्तिष्क कहीं अधिक सक्रिय होता है  वहीं दूसरी ओर हमें अधिक धैर्य की आवश्यकता होती है।


लेखन के बारे में सबसे कठिन हिस्सा, वास्तव में लिखना आरम्भ करने के लिए स्वयं को तत्पर करना है। 

अधिकांश लेखक आमतौर पर लिखना प्रारम्भ करने में नकारात्मकता का अनुभव करते है परंतु लिखना समाप्त कर लेने पर  इसे पसंद करते हैं।  कुछ लोगों के ऐसा सोचने का एक मूल कारण यह है कि वे असफल होने से डरते हैं।  वह यह सोचकर स्वयं पर अनावश्यक दबाव भी डालते कि उन्हें जो कुछ भी लिखें वह शानदार होना चाहिए।


 तथ्य यह है कि कोई भी प्रामाणिक रूप से सम्पूर्ण नही हो सकता  हर किसी में दोष या खामियां होती हैं और खामियां होना ही अधिक से अधिक लिखने के कारण के रूप में स्वयं में पर्याप्त है। लिखने का अभ्यास ही आपको बेहतर बना सकता है । 

लेखन के लिए  अनुशासन एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता हैअनुशासन रखने से कोई भी स्पष्ट रूप से सोचने में सक्षम होता है।  यह एक लेख के विवरण और तथ्यों को प्रस्तुत करने के तरीकों को सामने लाने में भी मदद करता है।


एक अनुशासित लेखक स्पष्ट रूप से सोचने और अपनी सांसारिक चिंताओं से परे जा कर जब उत्पादन पर ध्यान केंद्रित  कर पाता है 


लेखन का विषय निर्धारण किसी अपरिचित चौराहे पर खड़े हो कर किसी एक दिशा की ओर कदम बढ़ाने जैसा ही है..हर तरफ विषय ही विषय हैं..आवश्यकता है अपनी रुचि के साथ साथ लक्षित पाठक के आधार पर सही विषय का निश्चय किये जाने की । अनुशासन इसे हमारे लिए आसान बना देता है…


आसान और सुविधाजनक छोटे टुकड़ों में लेख के बारे में सोचने के लिए हमें खुद को अनुशासित करना चाहिए।  प्रत्येक विचार को एक अनुच्छेद के रूप में ले कर एक सरल एवं चरणबद्ध  रूपरेखा तैयार की जा सकती है जो हमारे विषय को संपूर्णता प्रदान करेगा।


 बेहतर परिणाम के लिए संपादित करने में शीघ्रता से बचने के लिए भी अनुशासित रहना आवश्यक है --कम से कम अभी तो नहीं 🙂

उत्तम लेखन की कुंजी विचारों को प्रवाहित होने देना है।  संपादन बाद के भाग में आना चाहिए। संपादन लेखन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, कम से कम उस चरण में जहां विचारों को वास्तव में निर्बाध प्रवाहित करना होता है 


इस सब के साथ ही लेख को फिर से पढ़ने और समीक्षा करने के लिए तथा एक अल्पविराम के अनुशासित रहना भी संतोषजनक परिणाम के महत्वपूर्ण है  एक अल्पान्तर के पश्चात लेख पर वापस आना किसी को भी इसे नए सिरे से देखने में सक्षम बनाता है।



 





संक्षेप में, अनुशासन किसी भी कार्य को व्यवस्थित तरीके से पूर्ण करने में सहायक है ..लेखन के लिए भी ..व्यवस्थित ओर अनुशासित रहें..और बेहतर लिखें 🙂🙏

9 comments:

  1. Wonderful.. The purpose of writing so well narrated. Yes self discipline, Regular habit of writing is important without bothering about good or not so good, Short or longish outcome. It's like breathing as we inhale or exhale. Oxygen of our self driving element that's all are expressed as we write. Your idea on purpose of writing is very genuine n true. Call of inner self.

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    1. A huge thanks ..for comprehending it in a beautiful manner.... Thank u so much for reading and appreciating 🙏🙏

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  2. अपना मूल्यवान समय दे कर गंभीरता से पढ़ने और इतने सुंदर शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए तुम्हारा भी धन्यवाद अरुषि... 🙂🙂🙂🍫

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  3. विषय वस्तु का सटीक एंव सार्थक विश्लेषण.. साधु वाद🌹

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका🙂🙏🙏

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  4. सुंदर विचार, अनुशासन मतलब स्वयं पर शासन, एक अंकुश जो सही गलत का निर्धारण करता है और हमेशा अच्छा करने को प्रेरित करता है।

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    1. सुंदर व्याख्या अनुशासन की आपके द्वारा..... 😇👌🙏🙏🙂आभार

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  5. सूक्ष्म निरिक्षण 👏👍

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सदानीरा.... नदी...सदा नीर भरी....कभी न सूखने वाली.... हर अंतर में बहने वाली...भावनाओ...अनुभूतियों ..

सूरजमुखी

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